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Monday, June 17, 2019
Saturday, June 15, 2019
Thursday, June 13, 2019
नौकर बना दुनिया का सबसे अमीर आदमी
जेफरी प्रेस्टन "जेफ" बेजोस (12 जनवरी 1964 का जन्म) अमेज़न.कॉम के संस्थापक, अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अमेज़न.कॉम बोर्ड के अध्यक्ष हैं।यह फोर्ब्स की 2018 की लिस्ट के अनुसार दुनिया के सबसे अमीर आदमी है। बेजोस, जो कि प्रिंसटन विश्वविद्यालय से स्नातक हैं और जिन्हें टाऊ बेटा पि नामक प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुका है, ने 1994 में अमेज़न की स्थापना करने से पहले डी. ई. शॉ और कम्पनी के लिए वित्तीय विश्लेषक का कार्य किया। या और वे अपने पशु-फ़ार्म पर कार्य करने लगे, जहां बेजोस ने अपनी जवानी की ग्रीष्मकालीन छुटियाँ अपने नाना जी के साथ कार्य करते हुए बिताई. बेजोस यहाँ पशु फ़ार्म के परिचालन से सम्बंधित विविध प्रकार के कार्य किया करते थे। छोटी उम्र में ही, उन्होंने यांत्रिकी कार्यों के प्रति जबरदस्त योग्यता दिखाई- जब वे एक बच्चे थे तभी उन्होंने पेचकस से अपना पालना खोलने का प्रयास किया।[2] जेफ बेजोस के जन्म के समय उनकी माता, जैकी, स्वयं एक किशोरी थी और उनका जन्म अल्बुकर्क, न्यू मैक्सिको में हुआ। बेजोस के पिता के साथ उनका विवाह एक वर्ष से भी कम समय के लिए चला. जब जेफ पाँच वर्ष के थे, तब उन्होंने दूसरा विवाह, मिगुअल बेजोस के साथ कर लिया। मिगुअल का जन्म क्यूबा में हुआ था और 15 वर्ष की उम्र में वे अकेले ही संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए थे और फिर अपनी मेहनत के बल पर वे अल्बुकर्क विश्वविध्यालय तक पहुँच गए। शादी के बाद, यह परिवार ह्यूस्टन, टेक्सास, चला गया और मिगुअल यहाँ एक्सॉन नामक कंपनी में इंजीनियर बन गए। जेफ ने ह्यूस्टन में चौथी से छठी कक्षा तक रिवर ओक्स एलीमैंट्री में पढाई की। बेजोस ने कम उम्र में ही विविध वैज्ञानिक वस्तुओं के प्रति तीव्र रूचि दिखाई. उसने अपनी व्यक्तिगतता बनाए रखने के लिए और अपने छोटे भाई बहनों को अपने कमरे से दूर रखने के लिए एक अलार्म कमरे में गुप्त रूप से लगा दिया। उसने अपने माता पिता के गैरेज को अपनी विज्ञान परियोजनाओं के लिए एक प्रयोगशाला में बदल दिया। बाद में, यह परिवार मियामी, फ्लोरिडा, चला गया जहां बेजोस ने मियामी पालमेंटो सीनियर हाई स्कूल में अध्ययन किया।[3] जब वह उच्च विद्यालय में था, तब उसने फ्लोरिडा विश्वविध्यालय में छात्र विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस प्रशिक्षण का लाभ उन्हें 1982 में तब मिला जब उन्होंने सिल्वर नाईट पुरस्कार से नवाजा गया।[4] उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान का अध्ययन करने के लिए प्रवेश लिया, परन्तु जल्दी ही वे उससे उकता गए और उन्होंने फिर से कंप्यूटरों की और रुख किया और फिर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक की उपाधी अत्यधिक प्रशंसा (सुम्मा कम लौड़े) के साथ प्राप्त की। उनके इस श्रेष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें फी बेटा कप्पा नामक संस्था सम्मान के रूप में अपनी संस्था की सदस्यता भी दी। 2008 में बेजोस को कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय से विज्ञान और प्रौद्योगिकी में मानद डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया गया।
Struggle to Success from satish anand
गोरखपुर से 90 किलोमीटर दूर नौतनवा कस्बे में पैदा हुए सतीश आनंद के पिता स्कूल में एक चपरासी थे और सड़क किनारे ही एक झोपड़ी में रहा करते थे| आज भले ही सतीश एक author और successful trainer हैं, पर एक वक्त था जब सतीश डॉक्टर बनाना चाहते थे| अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए सतीश के पिता ने झोपड़ी को गिरवी रख दिया था, पर सतीश Medical Exam क्लियर नहीं कर पाए और अपनी Family को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए घर से भाग कर लखनऊ आ गये| यहाँ सतीश ने एक ढाबे पर काम किया| इसी दौरान वो किसी के कहने पर सिकन्दराबाद आये, जहाँ उनके साथ धोखा हुआ और वो फिर से सड़क पर आ गये| यहाँ पर सतीश ने सड़क से कचरे उठाने का काम शुरू किया| इसके बावजूद उन्होंने कभी give up नहीं किया और वो hard work करते रहे| इसी hard work के चलते उन्हें एक Call center में नौकरी मिली| उनका hard work और उनका never give up करने का attitude उन्हें आगे ले गया और वो एक successful trainer बने|
My Life Tragic Story by sonu Sharma
In this video sonu sharma is describing about his life how he had achieved goals in his life. and he is speaking about his previous life.My Life Tragic Story
संकल्प की शक्ति Determination & Focus Sonu Sharma
Mr. Sonu Sharma is the founder of DYNAMIC INDIA GROUP (INDIA). An Author, Educator, Business Consultant and a successful Entrepreneur, he is a much sought-after speaker.Today he is one of the Youngest Inspirational Speaker in India He inspires and encourages individuals to realize their true potential. He has taken his dynamic personal messages to opposite sides of the globe. His 17 years of research & understanding in Direct Sales Industry has put Many organizations on a path of growth and fulfillment. Tens of thousands of people have benefitted from his Dynamic workshops in over 12 States in INDIA and 8.1 Million have heard him on YouTube across 192 Countries,More Than 2 Lac People Attends his live Seminars in India in the past few years.. Mr. Sharma is the Crown Ambassador & Highest Earner in One of the Leading Network Marketing Co in India Naswiz Retails (P) Ltd.
Wednesday, June 12, 2019
8वीं फेल यह लड़का बना करोड़पति, मुकेश अंबानी भी हैं इसके क्लाइंट, जानिए कैसे
नमस्कार दोस्तों, आज के इस विडियो में हम आपको बताएँगे 8वीं फेल यह लड़का बना करोड़पति, मुकेश अंबानी भी हैं इसके क्लाइंट, जानिए कैसे... जानने के लिए देखे यह पूरा वीडियो।
शुन्य से 200 करोड़ टर्नओवर की कंपनी तक
Amit Maheshwari .शुन्य से 200 करोड़ टर्नओवर की कंपनी तक.
This video is about Dr. Amit Maheshwari and his Success Story in Hindi from poor to Billionaire Journey, who is not only a successful businessman but also a Motivational speaker, Business & corporate trainer. The real inspiration for all generation. CEO and Founder DirectorMettas Overseas Ltd. Managing Director Gyan Institute Of technologies Pvt. Ltd.In Delhi.And Youngest President ever in history of Delhi Pradesh Maheshwari Yuva Sangathan. He is now a guiding force for the youth of the nation, enriching and empowering their lives.
पंजाब की इस लड़की को दिवाली की ख़रीदारी ने बना दिया करोड़पति
पंजाब की इस लड़की को दिवाली की ख़रीदारी ने बना दिया करोड़पति
सपनों को साकार करने और एक झटके में अमीर बनने के लिए लोग अक्सर लॉटरी का रास्ता अपनाते हैं. इसमें हाथ तो कई लोग आज़माते हैं पर किस्मत चमकती है किसी-किसी की. इस बार पंजाब सरकार का दिवाली बंपर जीता है, बठिंडा की लखविंदर कौर ने. बठिंडा के गांव गुलाबगढ़ की रहने वाली लखविंदर की किस्मत ने भी उनका साथ दिया. लखविंदर ने डेढ़ करोड़ रुपये का दिवाली बंपर जीता है. दिवाली से सिर्फ़ एक दिन पहले ही लॉटरी की टिकट ख़रीदने वाली लखविंदर को फ़ोन आया कि वह इस साल की दिवाली बंपर की विजेता बनी हैं.
क्या था पहला रिएक्शन?
करोड़पति बनने की ख़बर सुनते समय लखविंदर अपनी पहली प्रतिक्रिया देती हैं, "हमें लॉटरी स्टॉल वालों का फ़ोन आया उन्होंने हमें कहा कि अगर खड़े हो तो बैठ जाओ. यह सुनकर हम घबरा गए कि पता नहीं क्या हो गया है? तो उन्होंने कहा कि हम आपको ख़ुशखबरी सुनाने वाले हैं."
लखविंदर के अनुसार, जैसे ही उन्होंने यह बात सुनी उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा. पूरा परिवार यह बात सुनकर ख़ुशी मनाने में जुट गया.
लखविंदर लॉटरी डालने का क़िस्सा सुनाती हैं, "मैं अपनी मां के साथ दिवाली से एक दिन पहले ख़रीदारी करने के लिए बाज़ार गई थी और मैंने देखा कि एक स्टॉल पर खड़े होकर बहुत सारे लोग लॉटरी टिकट ख़रीद रहे थे. मैंने भी अपनी मां को कहा कि हमें भी लॉ
बैंक अफ़सर बनना चाहती है लखविंदर लखविंदर कहती हैं कि वह लॉटरी के पैसों से सबसे पहले ज़मीन ख़रीदकर एक अच्छा घर बनवाएंगी. लखविंदर के अनुसार, अभी वह जिस घर में रह रहे हैं, वह बहुत छोटा है. वह कहती हैं कि लॉटरी के इस पैसों से वह शहर जाकर पढ़ाई करेंगी. लखविंदर बैंक अफ़सर बनना चाहती हैं. 17 साल की लखविंदर अभी 12वीं क्लास में अपने गांव के स्कूल में ही पढ़ाई कर रही हैं. उनके तीन भाई-बहन और भी हैं. सभी पढ़ाई कर रहे हैं. लखविंदर का एक बड़ा भाई, एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई है. वह इस पैसे का इस्तेमाल उनकी पढ़ाई के ऊपर भी करेंगी. उनका कहना है कि वह इस लॉटरी के पैसों से अपनी मां के लिए ज़रूर कुछ करना चाहेंगी क्योंकि उनकी मां ने बहुत आर्थिक मुश्किलों का सामना किया है और वह बहुत मेहनत करती हैं.
पिता भी आज़मा चुके हैं लॉटरी में हाथ लखविंदर बताती हैं कि उसके घर के आर्थिक हालात ज़्यादा अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कुछ पालतू जानवर रखे हुए हैं जिनकी देखभाल उनकी मां करती हैं और वह दूसरे के खेतों से जाकर चारा लेकर आती है. उनके पिता परमजीत सिंह बठिंडा में एसपी दफ़्तर में होम गार्ड के तौर पर काम कर रहे हैं. परमजीत सिंह अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले हैं. घर की आर्थिक ज़रूरतें और बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च पिता के कंधों पर ही है. परमजीत सिंह भी कई बार लॉटरी में हाथ आज़मा चुके हैं लेकिन उन्हें कभी सफलता नहीं मिली. अपनी बेटी से बात करवाने से पहले परमजीत बताते हैं, "मैं पिछले 12 साल से लॉटरी डाल रहा हूं. पर कभी भी मेरी लॉटरी नहीं लगी. यहां तक कि एक साथ मैंने पांच लॉटरियां भी लगाई हैं पर किस्मत ने कभी साथ नहीं दिया." परमजीत के अनुसार, लॉटरी का यह पैसा मिलने में उन्हें क़रीब छह महीने लगेंगे.
सपनों को साकार करने और एक झटके में अमीर बनने के लिए लोग अक्सर लॉटरी का रास्ता अपनाते हैं. इसमें हाथ तो कई लोग आज़माते हैं पर किस्मत चमकती है किसी-किसी की. इस बार पंजाब सरकार का दिवाली बंपर जीता है, बठिंडा की लखविंदर कौर ने. बठिंडा के गांव गुलाबगढ़ की रहने वाली लखविंदर की किस्मत ने भी उनका साथ दिया. लखविंदर ने डेढ़ करोड़ रुपये का दिवाली बंपर जीता है. दिवाली से सिर्फ़ एक दिन पहले ही लॉटरी की टिकट ख़रीदने वाली लखविंदर को फ़ोन आया कि वह इस साल की दिवाली बंपर की विजेता बनी हैं.
बैंक अफ़सर बनना चाहती है लखविंदर लखविंदर कहती हैं कि वह लॉटरी के पैसों से सबसे पहले ज़मीन ख़रीदकर एक अच्छा घर बनवाएंगी. लखविंदर के अनुसार, अभी वह जिस घर में रह रहे हैं, वह बहुत छोटा है. वह कहती हैं कि लॉटरी के इस पैसों से वह शहर जाकर पढ़ाई करेंगी. लखविंदर बैंक अफ़सर बनना चाहती हैं. 17 साल की लखविंदर अभी 12वीं क्लास में अपने गांव के स्कूल में ही पढ़ाई कर रही हैं. उनके तीन भाई-बहन और भी हैं. सभी पढ़ाई कर रहे हैं. लखविंदर का एक बड़ा भाई, एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई है. वह इस पैसे का इस्तेमाल उनकी पढ़ाई के ऊपर भी करेंगी. उनका कहना है कि वह इस लॉटरी के पैसों से अपनी मां के लिए ज़रूर कुछ करना चाहेंगी क्योंकि उनकी मां ने बहुत आर्थिक मुश्किलों का सामना किया है और वह बहुत मेहनत करती हैं.
पिता भी आज़मा चुके हैं लॉटरी में हाथ लखविंदर बताती हैं कि उसके घर के आर्थिक हालात ज़्यादा अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कुछ पालतू जानवर रखे हुए हैं जिनकी देखभाल उनकी मां करती हैं और वह दूसरे के खेतों से जाकर चारा लेकर आती है. उनके पिता परमजीत सिंह बठिंडा में एसपी दफ़्तर में होम गार्ड के तौर पर काम कर रहे हैं. परमजीत सिंह अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले हैं. घर की आर्थिक ज़रूरतें और बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च पिता के कंधों पर ही है. परमजीत सिंह भी कई बार लॉटरी में हाथ आज़मा चुके हैं लेकिन उन्हें कभी सफलता नहीं मिली. अपनी बेटी से बात करवाने से पहले परमजीत बताते हैं, "मैं पिछले 12 साल से लॉटरी डाल रहा हूं. पर कभी भी मेरी लॉटरी नहीं लगी. यहां तक कि एक साथ मैंने पांच लॉटरियां भी लगाई हैं पर किस्मत ने कभी साथ नहीं दिया." परमजीत के अनुसार, लॉटरी का यह पैसा मिलने में उन्हें क़रीब छह महीने लगेंगे.
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